मेरा एक सफ़र

सैर सपाटा मनुष्य जीवन का अभिन्य अंग है जो कि प्रत्येक मनुष्य को किसी न किसी रूप में तो करना ही होता है| या तोह वह किसी काम के सिलसिले में होता है या तो सिर्फ मनुरंजन के लिए किया गया हो, हर यात्रा अपने आप में अनूठी होती है| उनसे संलग्न यादे उसे रोमांचक बना देती है| हाल ही में मुझे काम के सिलसिले में जबलपुर जाना पड़ा| मेरी ट्रेन लेट होने के बावजूद भी मुझे टाइम पर स्टेशन पंहुचा दिया गया| परन्तु इससे मुझे कोई प्रसन्नता नहीं हुई क्योकि मुझे १ बजे होटल समदरिया जाना था और मैं ११ बजे ही स्टेशन आ गयी थी| जबलपुर का यह मेरे जीवन का पहला सफ़र था, इससे पहले मैं कभी भी जबलपुर नहीं गयी थी फिर होटल समदरिया तो दूर कि बात थी| परन्तु मेरे चिंता का विषय पहली बार जबलपुर अकेले जाना न था बल्कि, यह दो गहनते अकेले बिताना था| अचानक मुझे उम्मीद कि एक किरण दिखी| एक महिला चमकदार वस्त्रो में मेरे सामने ई और मुझसे महिला विश्रामकक्ष के बारे में पूछने लगी| गौर से देखने पर मुझे यह आभास हुआ कि वह लाल पोषक नहीं अपितु शादी का वस्त्र था| बातो ही बातो में मुझे पता चला कि उनके पति सैनिक है और वह उनके साथ अपने पीहर से ससुराल जा रही थी| तत्पशचात उनके पति आ गए और वह उनके साथ चली गयी| अभी तक सिर्फ १२ ही बजे थे, पुरे एक घंटे का समयकाल अभी शेष था| तभी अचानक सामने से सफ़ेद मैले वस्त्रो में एक छोटी बालिका मुझे दृष्टिगोचर हुई| वह मेरे बगल के रिक्त स्थान पर बैठ गयी, उस वक़्त मैं अन्य ४-५ लोगो से वार्तालाप में मदमस्त थी और मुझे वह नन्ही बालिका जो कि भिकारन थी उसमे ख़ास रूचि न आई|तभी एक ट्रेन आई और मेरे  संग बैठे सारे लोग चले गए| इसके उपरांत ५-६ मिनट शांत रहने के बाद उस नन्ही बालिका से मैंने उसका नाम पुछा, उसने अपना नाम करिश्मा बताया| तभी मेरी नज़र उसके हाथो पर पड़ी जिसमे सुनीता नाम अंकित था, मेरे पूछने पर उसने बताया कि वह उसकी माता का नाम है| उसके घर में सिर्फ उसकी माता ही थी, जिनका व्यवसाय भीख मांगना है| वह नन्ही कक्षा ७ तक पढाई कर ज्ञान अर्जित कर पाई थी परन्तु इसके उपरांत उसकी माता ने उसे भीख मांगने पर विवश कर दिया| इसीलिए वह रोज़ कटनी से जबलपुर ट्रेन पर भीख मांगती है और २००-३०० रूपए दिन भर में कमा लेती है जिसमे से वह २० रुपया दाल चावल खाने में खर्च करती है| उसमे पढने कि बहुत अभिलाषा है और वह कदापि भिखारन नहीं बनना चाहती थी, परन्तु गरीबी…आज अगर वह गरीब न होती उसकी माँ बीमार न होती तो वह भी किसी स्कूल में पढ़ रही होती|

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4 thoughts on “मेरा एक सफ़र

  1. Jadubir says:

    Aapne kamse kam us ladki se baat to ki.. Mujhe pura yakeen hai, ki 10 mein se 8 to aise logon se baat bhi nahi karte. Garibi sach mein humare desh ki pramukh samasyaon mein se ek hai. Ye garibi hi hai to insaan ko aise kaam karne k liye vivash kar deti hai., jinhe karne se syad unke jeevan k sapne toot jaye.
    Aisi samasyaon se nidaan pana koi bacchon baccho ka khel nahi. Iske liye sarkaar ki khaas sahayta, evam karya karne ki dridta chaiye.

    Apni niji anubhavon ke madhyam se Samajik samasyon par roshni daalne ka ye accha tarika hai…. Aapki is khoobsurat blog par aapko hardik badhaiyan..

    • thnx.. india is havin gud human resource and v used utilize it properly instead of wasting… in 2050 the avg age of india vl b 25-27 …n with highr human resource

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